Moral Hindi Kahani - सोने का घड़ा - Hindi Story

सोने का घड़ा - Hindi Moral Story

हरियाणा के एक गांव में एक मूर्ख किसान रहता था | वही क्या, वह तो पूरा का पूरा गांव ही मूर्ख था |
वह किसान बड़ा गरीब था | उसके पास छोटा सा एक खेत था | जिससे वह अपना तथा अपने परिवार का पालन-पोषण करता था | घर में वह, उसकी पत्नी तथा तीन छोटे-छोटे बच्चे थे | खेती-बाड़ी के लिए दो बैल तथा एक गाय थी |
एक दिन किसान ने सोचा कि - “ मुझे खेती करते हुये बहुत दिन हो गये हैं | इसलिए अब कुछ दिन तक आराम से घर पर बैठकर खाना चाहिये |” ऐसा विचार करके उसने उसी दिन से खेतों पर काम करना बंद कर दिया |

कुछ दिन तक तो किसान खूब अच्छी तरह मौज उड़ाता रहा | लेकिन जब उसके पास धन थोड़ा रह गया, तो उसकी स्त्री ने उससे कहा कि - “ अब तुम खेती करना शुरू कर दो | लेकिन किसान के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी |”
जब इसी प्रकार कई दिन गुजर गये तो उसकी स्त्री ने एक दिन क्रोधित होते हुये कहा - “ देखो जी ! आप मेरी किसी भी बात पर ध्यान नहीं देते | घर का तथा जानवरों का खर्च कहां से आयेगा | खेत पर जाये बिना काम कैसे चलेगा |”
पत्नी की बात सुनकर किसान को भी ताव आ गया | उसने अपने बेलो को साथ लिया और हल को कंधे पर रखकर खेत की ओर चल दिया | चलते-चलते रास्ते में उसे एक आदमी मिला | उसने पूछा - “ क्यों भाई, इस समय कहां जा रहे हो ?”
किसान ने गुस्से में कहा - “ तुम्हें इससे क्या मतलब ? मैं तो अपने खेत पर जा रहा हूं |”
उस आदमी ने कहा - “ देखो बात यह है, कि तुम इस समय खेत को जोतोगे तो वहां तुम्हें सोने का घड़ा अशरफियों से भरा हुआ मिलेगा, इसलिए तुम आज से ही पूरे खेत को जोत डालो | लेकिन एक बात का और ध्यान रखना, कि धन को पाकर घमंड मत करना वरना तुम्हारा धन लूट या छीन लिया जायेगा |” इतना कहकर वह आदमी अचानक वहां से गायब हो गया |
वह किसान मूर्ख तो था ही इसलिए उसने उस आदमी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया | लेकिन जब वह अचानक गायब हो गया, तो उसे बड़ा ही आश्चर्य हुआ |
वह अपने खेत पर जा पहुंचा और उसे जोतना आरंभ कर दिया | जोतते-जोतते अचानक उसके हल का फार किसी चीज से टकराकर जमीन में गढ़ गया | किसान ने बहुत कोशिश की, कि हल को बाहर निकाल ले | लेकिन  फार इतनी गहराई से जमीन में गढ़ गया था कि किसी तरह निकलता ही नहीं था |
अंत में परेशान होकर किसान अपने घर लौट आया | घर जाकर उसने अपनी पत्नी से कहा - “ तूने किस घड़ी में मुझे खेत पर भेजा था | हल का फार जमीन में इस तरह गढ़ गया है, कि किसी प्रकार निकलता ही नहीं है | तु मेरे साथ चलकर उसे निकलवा दे |”
जब उसकी पत्नी ने यह सुना तो वह भी किसान के साथ चल दी | लेकिन उसे विश्वास नहीं हुआ कि हल का फार जमीन में गढ़ गया है |
खेत में पहुंचकर किसान की पत्नी ने देखा कि हल का फार धरती में गड़ा हुआ है | अब दोनों ने जोर लगाना शुरू किया | आखिर में खूब खींचतान करने पर बड़े जोर की आवाज के साथ हल का फार जमीन से छूट कर अलग हो गया |
जैसे ही फार अलग हुआ वैसे ही ‘खन’ की आवाज के साथ एक सोने का ढक्कन अलग हो गया |
किसान की पत्नी बुद्धिमान थी | उसने गड्ढे में जाकर देखा तो अशरफिया नजर आयी |
किसान की पत्नी ने सोचा कि यह अशरफिया किसी बर्तन में ही रखी होंगी | यह सोचकर उसने गड्ढे में हाथ डालकर खींचा तो सोने का एक घड़ा अशरफियों से भरा हुआ ऊपर आ गया |

Moral Hindi Kahani

किसान और उसकी पत्नी की आंखें फटी की फटी रह गयी | दोनों बहुत खुश हुये | जब उसे लेकर घर पहुंचे तो किसान को उस आदमी की बात याद आयी जिसने इसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी | उसने जब यह बात अपनी पत्नी से बतायी तो उसने सोचा कि “ कहने वाला भगवान के सिवा और कौन हो सकता है |”
उसकी पत्नी ने सुना कि उस आदमी ने यह भी कहा था कि - “ जितना धन मिले उसका आधा पुण्य कर देना |” तो उसने किसान से कहा कि - “ हमें आधा धन गरीबों को बांट देना चाहिए |” लेकिन किसान की उल्टी खोपड़ी में भला यह बात कहां से आती | उसने कहा - “ धन को बांट देने से भला हमें क्या फायदा होगा | आधा धन बेकार ही जायेगा | यह जरूरी तो नहीं कि हम उस आदमी की बात मान ले |”
लेकिन किसान की पत्नी ने धन के दो हिस्से करके एक हिस्सा गांव के गरीबों में बांट दिया |
इतने बड़े पुण्य की खबर सारे गांव में फैल गयी | जो भी इसे सुनता वह किसान तथा पत्नी की सराहना किये बिना नहीं रहता |
जब गांव के धनवान व्यक्तियों और जमींदारों ने सुना कि उस किसान को कहीं से इतना धन मिला है, तो उन्हें बड़ी जलन हुयी | उन्होंने किसान के पास जाकर पूछा - “ क्यों भाई ! तुम तो अब बड़े मालदार हो गये हो | बताओ तो सही कि वह धन तुम्हें कहां से मिला |”
किसान मूर्ख तो था ही | उसने सारी बात जमीदारो को बता दी | तब जमीदार लोगों ने सोचा कि “ हम भी ऐसा ही करें | शायद कभी हमारी भी तकदीर खुल जाये और हमें भी अशरफियो से भरा घड़ा मिल जाये | यह सोचकर वे सभी अपने अपने घर चले गये |
धन पाकर किसान को बड़ा अभिमान हो गया | किसान ने सोचा कि “ अब मैं गांव का सबसे धनवान हो गया हूं, जमीदार भी मेरे सामने दबता है | अब मुझसे कोई आंख नहीं मिला सकता |”
अब तो किसान ने गरीबों से बेगार लेना तथा उन्हें सताना शुरू कर दिया | उसके विरुद्ध कोई कुछ कह भी नहीं सकता था | क्योंकि जमीदार भी उससे दबता था | लोग उससे बहुत दु:खी हो गये |
उधर जब जमीदारो और दूसरे धनवानो ने अपने खेत जूतवाये तो उनमें कुछ नहीं निकला | इससे खेत और खराब हो गये | मेहनत भी इतनी लगी कि कुछ लोग तो बीमार हो गये |
अब जमीदार को किसान पर बड़ा क्रोध आया | उसने सोचा कि - “ किसान ने हमें मूर्ख बनाया है, उसे यह धन कहीं से नहीं मिला है | बल्कि उसने कहीं से उड़ाया है |”
यह सोचकर उसने अपने सिपाहियों को भेजकर किसान का सारा धन छीनवा लिया | उसके साथ उसके पसीने की कमाई का धन भी छीन लिया | इसके बाद उसे कोड़ों से इतना पीटा गया कि वह कई दिन तक कराहता रहा | वह धन जमीदार ने गांव वालों को बटवा दिया |
किसान को घमंड का फल मिल गया था |

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